..और राशन वाले बाबा जी हो गए सैफदीपुर

Aug 10, 01:04 am
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गरीबों को मुफ्त राशन..शिक्षा..स्वास्थ्य सुविधा, कमजोर वर्ग की लड़कियों की शादी..नशा पुनर्वास केंद्र सहित और भी ढेरों सामाजिक कार्य..। इन सबके पीछे है बस एक नाम। जी हां, ठेकेदार बलविंदर सिंह, जो एक दशक पहले तक एक सफल व्यवसायी और क्षेत्र में अच्छे खासे दबदबे वाले थे। उन्होंने अपने आसपास के गरीब व पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए एक छोटी सी शुरुआत की। धीरे-धीरे यह प्रयास इतना बढ़ा कि उन्हें कर्जदार भी कर गया, लेकिन गुरु साहिबान के इस बंदे ने अपने सेवा नहीं छोड़ी। इस सब कुछ ने ठेकेदार बलविंदर सिंह सैफदीपुर को 'राशन वाले बाबा जी' का नाम जरूर दे दिया।
स्वतंत्रता सेनानी स्व. रणजीत सिंह के पुत्र सैफदीपुर आज खुद में एक संस्थान हो गए हैं। उनकी सेवा देख सजह प्रश्न उठते हैं कैसे मैनेज होता है? कहां से पैसा आता है इतना पैसा? क्यों करते हैं? इन सवालों पर सैफदीपुर का बस एक ही जवाब होता है वाहे गुरु की कृपा है..मेरी ड्यूटी लगाई है..मैं कर रहा हूं..संतुष्टि मिलती है..सब परमात्मा देता है..वो ही करता है।
दिलचस्प है कि अतरराष्ट्रीय भाऊ भाईचारा के बैनर तले सैफदीपुर की ओर से शुरू किए गए मोदी खाने और मुफ्त राशन लेने वालों को कार्ड बना कर पूरे परिवार के लिए आटा-दाल से लेकर नमक, मिर्च, तेल, चाय, चीनी आदि हर घरेलू उपयोग की सामग्री दी जाने लगी तो राजनीतिक दलों की आंख भी उन पर आ गई। शिरोमणि अकाली दल की सरकार के पिछली बार सत्ता में आने से पहले हुए चुनावों के प्रचार के दौरान सनौर से प्रकाश सिंह बादल ने बहुप्रचारित आटा-दाल योजना की घोषणा कर दी। कहा गया कि सत्ता में आए तो हर गरीब के लिए मोदी खाने खोल दिए जाएंगे। आजकल सैफदीपुर पूरा राशन तो नहीं दे रहे, पर आटे में कोई कमी नहीं है वो भी अच्छे ब्रांड के।
दूसरी ओर उनकी ओर से चलाए गए स्कूल व नशा पुनर्वासन केंद्र में होने वाले खर्च का अब आर्थिक प्रबंधन करने के सवाल पर वे कहते हैं कि दुबई के होटल व्यवसायी एसएस ओबेराय ने उनकी बांह थामी है। उन्होंने मूक बधिरों के लिए बनाए गए स्कूल में आठ दस करोड़ रुपये लगाने का विश्वास दिलाया है। इस स्कूल में 152 बच्चे पढ़ रहे हें। वैसे जब कभी जरूरत ज्यादा होती है तो पुराने दोस्तों की मदद भी ले लेते हैं, वैसे सारा खर्च जमीन जायदाद से ही चल रहा है।
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उपलब्धियां
-मुफ्त राशन बांटने के लिए राज्य भर में 517 मोदी खाने खोले, लाभ लेने वालों की संख्या हजारों में
-वर्ष 2003 में 50 लड़कियों की शादी करवाई, प्रत्येक को 21 हजार रुपये की घरेलू वस्तुएं दीं, अब तक आंकड़ा एक हजार के पार योगदान 10-15 हजार में सिमटा
-पटियाला डेफ एंड डम्ब स्कूल को पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के साथ एक एकड़ जमीन दी,
-नि:शुल्क मेडिकल कैंप लगाना, मुफ्त दवा और चश्मे बांटना
-अंगहीनों के लिए अलग कैंप लगा कैलीपर, ट्राई साइकिल, सुनने वाली मशीन देना
-ढाई एकड़ में नशा पुनर्वासन केंद्र खोला, 30-35 लड़कों के लिए एसी उपचार केंद्र

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